चूहे से टूटी श्रद्धा

श्रद्धा से भक्ति और भक्ति से परम कल्याण । लेकिन कोई इसको समझ नही पाया । जब उसने देखा की शिवलिंग से एक चूहा प्रसाद ग्रहण कर रहा है तो…

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हलाल अर्थव्यवस्था से तथाकथित हिंदूवादी नेता परेशान क्यों ?

टवीटर पर एक ट्रेंड पिछले कई हफ्तों से चल रहा था , अभी भी इक्का दुक्का खबरे, हलाल के बढ़ते हुए सर्टिफिकेशन पर आपके पास आ ही जाती होगी। यंहा…

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पालघर लिंचिंग- एक भक्त की व्यथा

हमारा दुर्भाग्य तब शुरू हो गया जब  एक दिल दहलाने वाली विडिओ पर हमारी दृष्टि चली गयी, विडिओ का मंजर भयानक था, इसमें एक भीड़ महाराष्ट्र के पालघर जिले में, भगवा वस्त्र पहने दो साधुओं को लाठिओं व् डंडो से निर्दयता पूर्वक मार, मार कर उनकी हत्या कर देती है । ऐसा नहीं था की उस भीड़ से उनकी रक्षा करने वाला वहां कोई नहीं था, पुलिस घटना स्थल पर मौजूद थी, साधू लाठिओं की मार से बचने के लिए बार बार पुलिस वाले के पास जाते थे पर पुलिस वाला उनका हाथ छिटक कर उन्हें भीड़ के सामने अकेला मरने के लिए छोड़ देता हैं ।

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क्या धर्म के नाम पर हिंसा जायज है ?

'क्या धर्म के नाम पर हिंसा जायज है ?' जब यह प्रश्न किसी से पूछा जाता है तो लगभग सभी का जवाब एक ही होता है की नहीं, पर अगर इसका जवाब निश्चित ही "नहीं" ही होता तो हमें इस लेख को लिखने मेँ समय नष्ट नहीं करना पड़ता।

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अगर ऐसा हुआ तो हिन्दू धर्म की रक्षा कौन करेगा ?

आज हिन्दू धर्म की रक्षा करने के लिए चारो तरफ हाहाकार मचा है . भारत वर्ष के हिन्दू अपने धर्म की रक्षा को लेकर अत्यंत चिंतित है एवं भयभीत है . एक ४ फूट का आमिर खान उनके सामने थोड़े से प्रश्न खड़े करता है तो शाश्त्र मति न होने के कारण उनके मुह से श्लोक के बजाये सिर्फ ‘गर्व से कहो हम हिन्दू है निकलता है’ हर तरफ नफरत की धुध इतनी गहरी है की हिन्दू धर्म के ठेकदार बने लोग ये भूल चुके है की धर्म की रक्षा के लिए धर्म में विश्वाश होना जरूरी है न किसी दुसरे धर्म के व्यक्ति से नफरत .

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परम् भगवान कौन?

एक हिन्दू किसी को भी भगवान मान सकता है एक पीपल के पेड़ से लेकर , इंद्र को , और इंद्र से लेकर ब्रह्मा को , ब्रह्मा से लेकर शिव को और जब ये सब कम पड़ गए तो फिर उन्होंने साईं बाबा को भी भगवान स्वीकार कर लिया। और तो और जब एक संतोषी माता नाम की फिल्म आयी तो संतोषी माता को देवी स्वीकार कर लिया लेकिन संतोषी माता का नाम भारत के किसी भी वेद , या धार्मिक वाक्यों मैं नहीं आता है। जंहा से भी दूकान चल निकले बस वो ही हिन्दुओ के भगवान् बन जाते है।

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क्रोना वायरस एक विषाणु के आगे आधुनिक विज्ञान ने घुटने टेके।

आज वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर पानी ढूढ़ने की बात करते है लेकिन धरती के पानी को उन्ही के विज्ञान ने दूषित कर दिया है। जो काम बैल से गाडी से हो जाता था उसके लिए उन्होंने पैट्रॉल डीजल आधारित इंजन बनाये जिसका नतीजा आज ग्लोबल वार्मिंग बन कर हमारे सामने आया है। विज्ञान के आधुनिक ट्रांसपोर्ट के साधनो के कारण एक प्रदेश /देश की बीमारी सरलता से दूसरे देशो मैं फैल जाती है। जिस विज्ञान पर हमे इतना भरोसा है, आज उसी विज्ञान ने एक छोटे से विषाणु जो इन नेत्रों से दिखाई भी नहीं देता है उस के सामने घुटने टेक दिए है।

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