चूहे से टूटी श्रद्धा

श्रद्धा से भक्ति और भक्ति से परम कल्याण । लेकिन कोई इसको समझ नही पाया । जब उसने देखा की शिवलिंग से एक चूहा प्रसाद ग्रहण कर रहा है तो उसे विग्रह पूजा और मूर्ति पुजा मे कन्फ़्यूज़ हो गया । सभी जीवों के हृदय मैं परम् भगवान विष्णु रहते है । और शिव जी परम् वैष्णव है । इस लिए चुहे के रूप मे प्रसाद ग्रहण करने आये थे लेकिन अपने पूर्वाग्रह के चलते किसी को लगा अर्रे मूर्ति अपने प्रसाद की रक्षा ही नही कर पाई । भाई प्रसाद शिव जी का था वो जिसे चाहे खिलाये उनके लिए तो चूहा भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितने आप और में । बस इस एक घटना से पूरे पुराणों के खिलाफ अभियान चलाया । विग्रह पूजा को मूर्ति पूजा बोला और इस्लाम और ईसाइयत के हिसाब से सनातन धर्म को परिभाषित करने के कोशिश की । इन्हें हर चीज़ मे वैज्ञानिक कारण बताना पड़ता है । जैसे की तुसली पूजा इसलिए की जाती हैं क्योकि उसमे ओशोधिय गुण है । लेकिन वास्तविकता तो ये है कि तुलसी भगवान विष्णु (दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति विष्णुजी को कल्पना बोलते है और कृष्ण को भगवान स्वीकार नहीं करते उन्हें महान पुरुष बताते है ) कि भक्त है । इस लिए सम्मानित है । आयुर्वेद के इष्ट देश भगवान धन्वंतरि भी तो विष्णु के अवतार है लेकिन इन्ही तथाकथित लोगो ने आयुर्वेद से धन्वन्तरि को और मन्त्रो को अलग कर दिया और नतीजा सबको पता है कि आयुर्वेद का असर भी अब सिर्फ 50 प्रतिशत होता है । फिर कोई आएगा और बोलेगा की भगवान कृष्ण रास नही रचाते थे, अरे अज्ञानी मनुष्य को फ़ॉलो करने वालो वो भगवान है और आने भक्तो की प्रसन्नता के लिए कुछ भी कर सकते है । फिर बोलेगे उनकी 16000 रानिया थी। तो भाई भगवान है , हर जगह हर किस के साथ एक साथ होते थे वो । मुसलमानो के कुरतको का सामना कर नही पाए तो सनातन धर्म से विग्रह पूजा का महत्व ही खत्म कर दिया । सत्य तो यह है भगवान कृष्ण निराकार भी है , साकार भी है और परमात्मा रूप मे हम सब और सभी जीवों के हृदय मे निवास करते है । उन्हें साकार स्वीकार न करके आप उनको अधूरा कर देते है । धर्म के मामले मे हम तो कट्टर है भाई । क्योकि किसी ने चूहे को भगवान शिवजी का प्रसाद खाते देख कर उसकी श्रद्धा टूटू गयी तो उस व्यक्ति की श्रद्धा कमजोर थी । न कि हमारा धर्म , और पुराण और शास्त्र। आप सब से निवदेन है कि शिक्षा परम्परागत गुरुवो से प्रपात करे जैसे माधवाचार्य, शंकराचार्य , श्रील प्रभुपाद , श्री निम्बार्काचार्य, श्री वल्लभाचार्य , श्री रामनुजाचर्ये , श्री राममानंदी , जो कि भगवान को भगवान् स्वीकार करते है ।जीवन छोटा सा है भक्तो करके और हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे इस महामन्त्र का जप करे और जीवन सफल बनायें ।

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