क्रोना वायरस एक विषाणु के आगे आधुनिक विज्ञान ने घुटने टेके।

क्रोना वायरस एक विषाणु के आगे आधुनिक विज्ञान ने घुटने टेके।

आज वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर पानी ढूढ़ने की बात करते है लेकिन धरती के पानी को उन्ही के विज्ञान ने दूषित कर दिया है। जो काम बैल से गाडी से हो जाता था उसके लिए उन्होंने पैट्रॉल डीजल आधारित इंजन बनाये जिसका नतीजा आज ग्लोबल वार्मिंग बन कर हमारे सामने आया है। विज्ञान के आधुनिक ट्रांसपोर्ट के साधनो के कारण एक प्रदेश /देश की बीमारी सरलता से दूसरे देशो मैं फैल जाती है। जिस विज्ञान पर हमे इतना भरोसा है, आज उसी विज्ञान ने एक छोटे से विषाणु जो इन नेत्रों से दिखाई भी नहीं देता है उस के सामने घुटने टेक दिए है। और अफ़सोस की बात है फिर भी हम इस आधुनिक विज्ञान जो की कभी भी हमारी वास्तिवक समस्या को हल नहीं कर पाया उस पर अंध विश्वास करते है। इसी विज्ञान के कहने पर अपनी खेतो मैं जहर भी डालने और खाने के लिए तैयार है। जो की आज एक पूरी पीढ़ी को कैंसर का शिकार बना रहा है। लेकिन जो वैदिक संस्कृति है उसका मजाक उड़ाना सभी को ठीक लगता है। एक व्यस्थित ढंग से जो वैदिक गुरुकुलों और संस्कृति का विनाश किया गया जिससे की लोग साधारण जीवन और उच्च विचार त्याग कर भोग विलास लगे और नतीजन कुछ लोगो के गुलाम बन कर रह जाए।

कोई इन विज्ञानिको से पूछे की भाई एक बात बता तुमने शुरवात की थी की विज्ञान की तरक्की से मनुष्यो को मौत नामक बिमारी से एक दिन बचा लगे लेकिन मौत से बचाना तो दूर की बात हर साल कोई न कोई नहीं बिमारी हमारे सामने आती है। ये एक वैक्सीन तैयार करते है और नया जीवाणु- विषाणु हमारे सामने आ जाता है। जीवन की वास्तविक समस्या जैसे मृत्यु , बुढ़ापा, बीमारी का कोई इलाज़ नहीं खोज पाए तो, इन्होने अपना दिमाग बैल गाडी के बजाये इंजन से गाडी को कैसे चालये इससमे में लगाया , टीवी, कैमरा बना दिया जिससे की लोग वास्तविक समस्या भूल जाए। और इन्हे भोगो मैं लग कर अपना मनुष्ये जीवन बर्बाद कर ले। विज्ञान पर अंधविश्वास ठीक नहीं है।

हमारे महान आचर्यों जैसे की शंकराचर्या, माधवाचर्य , निम्बार्क आचर्य , रामानुचार्य चैतन्य महाप्रभु , रूप गोस्वामी , सनातन गोस्वामी ने मनुष्ये जीवन को अति महत्वपूर्ण बतया है क्योकि इस शरीर के जरिये हम एक ऐसा दिव्ये शरीर पा सकते है जिसकी कभी मृत्यु नहीं होती है। जो कभी बूढ़ा नहीं होता है और जिसको कभी कोई बीमारी नहीं लगती है। ऐसी जगह के बारे मैं भगवान श्री कृष्ण ने गीता जी के 8 . 15 मैं कहा है की मामुपेत्य पुनर्जन्म दु:खालयमशाश्वतम् ।
नाप्‍नुवन्ति महात्मान: संसिद्धिं परमां गता: ॥ १५ ॥ “मुझे प्राप्त करके महापुरुष, जो भक्तियोगी हैं, कभी भी दुखों से पूर्ण इस अनित्य जगत् में नहीं लौटते, क्योंकि उन्हें परम सिद्धि प्राप्त हो चुकी होती है |”
इस अगले श्लोक मे ही भगवान कृष्ण फिर से बताते है की हे अर्जुन।

आब्रह्मभुवनाल्ल‍ोका: पुनरावर्तिनोऽर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥ ८ १६

8 . 16 इस संसार में उच्च लोक से लेकर निचे के सभी लोक दुखों के घर हैं, जहाँ जन्म तथा मरण का चक्कर लगा रहता है | किन्तु हे कुन्तीपुत्र! जो मेरे धाम को प्राप्त कर लेता है, वह फिर कभी जन्म नहीं लेता |

तो भगवान कृष्ण के अनुसार हमको अपने मानव जीवन का उपयोग महान लक्ष्ये के लिए करना चाहिए। वो महान लक्ष्ये है की हम इस बार बार दुःख मिलने वाली जगह को तरुंत छोड़ कर भगवान श्री कृष्ण के प्लेनेट या धाम पर चले जाए। भगवान श्री कृष्ण ने इसकी घोषणा भगवद गीता मैं की है। तो हमे अपना जीवन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में लगाना चाहिए।

आखिर लाखो मोदी आएंगे लाखो मोदी जायेगे , आज बीजेपी कल कांग्रेस , इनको चलाने वाले नेता श्री अटल जी , सुषमा जी नेहरू , राजीव गाँधी जो की बड़ी बड़ी बाते करते थे वो अब कँहा है? हम से कोई नहीं जनता है। हम अगर इनके बारे अपने मित्रो , रिश्तेदारों से चर्चा भी करे तो सिर्फ बहस मे अपना समय बर्बाद कर देते है। उस बहस या चर्चा से हमारा कोई भी फयादा होने वाला नहीं है। उलटे हम अपने रिश्ते और मित्रता को खराब कर देते है। क्योकि भगवान कृष्ण ने इस जगत को दु:खालयम- आशाश्वतम् कहा है लेकिन आपको लगता है आप इस दुखालयम को सुखायलाम बदल देंगे लेकिन अफ़सोस की बात है की इस जगत का डिजाइन ही ऐसे हुआ है की यंहा कोई सुखी नहीं रह सकता है।।

तो क्या इस समस्या का कोई समाधान है जी बिलकुल है। इस जगत के सबसे शक्तिशाली आध्यतमिक जगद गुरु श्रील प्रभुपाद कहते थे की उनके पास एक उत्तम विधि है जिसका पालन करने इस भौतिक जगत मे भी सुरक्षा और सम्पनता प्राप्त होगी और इस शरीर की मृत्यु के बाद आपको या तो उच्त्तम देव लोक मैं या फिर स्वयं भगवद धाम की प्राप्ति भी हो सकती है। इस विधि मैं आपको सिर्फ “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे इस महामंत्र का जप करना है थोड़ा बहुत भगवद गीता , भगवद पुराण का अध्यन करना है बस। इतना ही पालन करने से आपकी महान भय से रक्षा होगी। क्योकि अगर आप इस महामंत्र की शरण लेते है तो आपको नीचे की योनियों मैं जनम नहीं लेना पड़ेगा आप कुत्ता, सुवर बनने से बच जायेगे आप अगर इस मार्ग पर थोड़ी सा भी प्रयास करते है तो वह नष्ट नहीं होता वह आपके साथ अन्य लोक एवं अन्य योनियों मे जायेगा और आपकी भगवद भक्ति बानी रहेगी जंहा से आप फिर से भगवद प्राप्ति का प्रयास कर सकते है। तो ऐसे क्रोना विष्णु , और अन्य बीमारियों से मुकबला करते करते आपके कई जीवन नष्ट हो चुके है। आप पिछले कई जन्मो से इनसे संघर्ष कर रहे है। इसबार इस जीवन में आप विज्ञानको के भौतिक विज्ञान को छोड़ कर शाश्त्रो में जो सूक्ष्म विज्ञान है उसको जानने का प्रयास करे। श्रील प्रभुपाद ने इसी के लिए इस्कॉन संस्था का निर्माण किया आप इस संस्था के बने हुए मंदिर जा सकते है या फिर श्रील प्रभुपाद की पुस्तकों का अध्यन कर सकते है। इस प्रयास मात्र से आपको मनुष्ये जीवन की उच्चतम सिद्धि मिल सकती है।

अकिंचन दास

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